क्या बिहार में “लालू युग ” का अंत होने वाला है ?

क्या बिहार में “लालू युग ” का अंत होने वाला है ?

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End of Lalu Era

देश हो या विदेश बिहार का नाम आये और “लालू ” की चर्चा न हो ऐसा हो ही नहीं सकता है | कई बार तो लालू को बिहार का पर्यायवाची शब्द भी समझ लिया जाता है।

परन्तु लालू का नाम बिहार के स्वर्णिम इतिहास में किसी काले धब्बे से काम नहीं माना जा सकता है | बिहार में कानून व्यवस्था की बद से बद्तर स्थिति हो या हर मामले में पिछड़ा बिहार इन सबका श्रेय माननीय लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल को जाता है।

अभी दो दिन पहले शुरू हुए अंग्रेजी टीवी चैनल “रिपब्लिक” ने अपना सबसे पहले शिकार लालू को ही बनाया | लालू पहले से ही चारा और पशुपालन घोटाला का दंश झेल रहे थे , इसी बीच इनके और बिहार के कुख्यात माफिया डॉन शाहबुद्दीन के  2016  में हुई एक फ़ोन कॉल की टेप लीक हो जाती  है |

इस टेप को  सुनने से साफ़ पता चलता है कैसे बिहार में कानून व्यवस्था में एक माफिया  हस्तक्षेप होता है और कैसे लालू एक माफिया डॉन से आर्डर लेते हैं |

इस खबर के बाद काफी तहलका मचा , बीजेपी वालों ने लालू-नितीश की जोड़ी तोड़ने की पुरजोर कोशिश की लेकिन मज़ाल है जो लालू या नितीश के मुँह से चू  तक निकले।

लालू और उनके बेटों पर इससे पहले भी कई तरह के घोटालों  के इलज़ाम लग चुके हैं , जैसे की नया नया हुआ मिटटी घोटाला |

आप को बता दे की सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार लालू वैसे भी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं , परन्तु सत्ता में रहने का मोह उनसे छूटता ही नहीं है।  फिर वो पत्नी के द्वारा हो या अपने बेटों के द्वारा |

90 के दशक  में प्रकाश में आये “पशुपालन घोटाला “ जिसे आम लोग “चारा घोटाला” के नाम से भी जानते हैं में लालू मुख्य अभियुक्त हैं |

ये घोटाला कई करोड़ों का था और इसने बिहार की राजनीति में तहलका मचा दिया था |

१. ये घोटाला लालू के कार्यकाल में हुआ जो साल 1990 से 1997 तक था।

२. ये घोटाला करीब 1000 करोड़ रुपए का था।

३. ये रूपए बिहार सरकार के राजकोष से फ़र्ज़ी कंपनियों के नाम पर निकाले गए थे।

४. आज आये सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक लालू के ऊपर ट्रायल चलेगा और उसे नौ महीने के अंदर ख़तम करना होगा।

५. लालू के ऊपर आपराधिक षड़यंत्र रचने और धोखाधड़ी का केस चलेगा।

६. सुप्रीम कोर्ट ने झारखण्ड हाई कोर्ट के उस फैसले पर ध्यान नहीं दिया जिसमे लालू को निर्दोष करार दिया गया था

७. जनवरी 1996 में इस घोटाले के प्रकाश में आने के बाद लालू यादव को इस्तीफ़ा देना पड़ा था और उसके उन्होंने अपनी अनपढ़ पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया था।

८. लालू के अलावा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जग्गनाथ मिश्रा , विभाग मंत्री और दो आईएएस अफसर भी इस केस के लपेटे में आये थे।

९. अक्टूबर 2013 में रांची में विशेष सीबीआई कोर्ट ने लालू यादव को दोषी ठहराया और 5 साल की सजा दी।  इस सजा की वजह से लालू अगले 11 साल तक चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। लालू ने इस फैसले के खिलाफ झारखण्ड हाई कोर्ट में अपील की है।

१०. करीब पंद्रह साल बाद लालू को पांच साल की सजा हुई और अभी वो फ़िलहाल बेल पर बहार हैं।

११. लालू पर फिलहाल 3 केस चल रहे हैं जिनमें उन्हें मुख्या अभियुक्त बनाकर धोखाधड़ी से राज कोषागार से पैसे निकलने का इलज़ाम है.

१२. सीबीआई ने कुल 61 केस फाइल किये थे जिनमे सीबीआई कोर्ट ने 43 में फैसला सुनाया , करीब 1200 को इसमें काण्ड में दोषी पाया गया था।

इतने सारे पेंचो में फंसे लालू का अब इस दलदल से निकलना  लग रहा है क्यूंकि न तो अब बिहार में उनकी ऐसी साख बची है और न ही केंद्र  उनके बहुत ही अच्छे दोस्त हैं।

बिहार में समोसा भी रहेगा और उस समोसे में आलू भी रहेगा परन्तु बिहार और भारत के राजनैतिक इतिहास से “लालू ” का नाम मिटता नज़र आ रहा है।

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